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नश्वर

Written by  on October 14, 2019

author unknown

 

 

 

टैक्सी ने पत्रकार मनीष को शिमला के उस सुनसान घर के सामने उतार दिया था, जिसके बारे में बचपन में उसने कई अजीबोगरीब कहानियां सुनी थीं। हालांकि घर के थोड़ी दूर पर बाज़ार का चहल पहल वाला माहौल था, लेकिन वो घर फिर भी सभी तरह के संपर्कों से कटा कटा सा लगता था।
मनीष उस घर के बाहर खड़ा याद कर रहा था कि किस प्रकार से इस घर में आने के पीछे अखबार के संपादक से उसकी बहस हो गयी थी लेकिन थक हारकर नौकरी बचाने के लिए उसे इस घर में रह रही इकलौती महिला मालिनी का वह साक्षात्कार लेने गया।

मालिनी दीक्षित, जो कि डॉक्टर रवि दीक्षित की धर्म पत्नी थीं। उनसे उनके पति की मौत के बारे में पूछने को साफ मना कर दिया था संपादक ने।
“अजीब पागल है हमारा एडिटर भी, दुनिया यही जानना चाहती है कि डॉक्टर और विख्यात बायोलॉजिस्ट रवि दीक्षित की मृत्यु कैसे हुई और इसने यही सवाल पूछने से मना कर दिया! केवल रवि दीक्षित की उपलब्धियां जानकर क्या करेगी दुनिया? जबकि मौत के बारे में पता चलता तो कुछ मसालेदार खबर बनती।”
लेकिन फिर रवि के जेहन में आया “डॉक्टर रवि की मौत के सदमे के कारण उनकी बीवी ने घर से निकलना ही छोड़ दिया, उनका सारा ज़रूरी सामान एक नौकर ले आता था। उनको इतने सालों से किसी ने घर से निकलते नहीं देखा तो इस तरह का सवाल उनको और दुख देगा, मुझे अपने सवाल केवल डॉक्टर साहब की उपलब्धियों और उनकी शादी की कुछ बातों तक ही सीमित रखने होंगें।”
इन्हीं सब खयालों के साथ मनीष ने उस सुनसान से घर का दरवाजा खटखटाया। दरवाज़ा ‘चर्र’ की आवाज़ के साथ एक महिला ने धीरे धीरे से खोला। वो महिला कुछ 30 वर्ष से अधिक की नहीं लग रही थी, उसने काला चश्मा लगा रखा था और ज़रूरत से ज़्यादा ही कपड़े पहन रखे थे।

“मैडम को ज़्यादा ही सर्दी लगती है शायद, आज तो धूप भी निकली है अच्छी खासी।” मनीष ये सोचते हुए घर के अंदर घुसा तो उसका शरीर ठंड के झोंके से सिहर गया।

“उफ्फ!” उसके मुंह से यह अनायास ही निकला। जिससे महिला का ध्यान मनीष की तरफ गया, महिला ने धीमी लेकिन मधुर आवाज में उससे कहा- “आप ये बगल में पड़ी शाल उठा लीजिए, घर के अंदर के तापमान में इस तरह आप साक्षात्कार नहीं कर पाएंगे। मैं आपके लिए चाय बना देती हूं।” -कहकर महिला चाय बनाने चली गयी।

मनीष शाल ओढ़कर पास पड़ी कुर्सी पर बैठ गया, घर मे उसने अजीब सी मनहूसियत महसूस की। उस बड़े से सुनसान घर मे उन दो प्राणियों के अलावा कोई नहीं था, उसने अपने चारों तरफ देखा, दीवारों पर बहुत ही कीमती कीमती पेंटिंग्स टंगी हुई थीं लेकिन डॉक्टर रवि या उनकी बीवी की एक भी फोटो उसने नहीं देखा, घर के अंदर की घोर चुप्पी को या तो घड़ी की ‘टिक टिक’ भंग कर रही थी या फिर बाहर से आते जाते वाहनों का शोर।

कुछ ही देर में वो 30 वर्षीय महिला चाय के दो प्याले ट्रे में सजाकर लेकर आ गयी और पहली बार मनीष ने ध्यान दिया कि उस महिला की त्वचा ज़रूरत से कुछ ज्यादा ही सफेद थी और उसने घर के अंदर काला चश्मा भी पहन रखा था जिससे मनीष को कुछ अजीब लग रहा था।

महिला ने धीरे से चाय की ट्रे मनीष के सामने वाली मेज पर रखी और खुद अपना प्याला लेकर सामने वाली कुर्सी पर बैठ गयी।

रवि ने पूछना शुरू किया- “देखिए बुरा मत मानियेगा लेकिन जितना मुझे डॉक्टर साहब के बारे में पता है, उनकी उम्र तो काफी अधिक थी और इसके हिसाब से आपकी उम्र भी कम से कम….”

तभी महिला ने बीच मे टोक दिया- “अरे नहीं नहीं आप गलत समझ रहे हैं, मैं उनकी बेटी सुषमा हूँ।”

ये सुनकर मनीष हल्का सा चौंका, वो सवालिया अंदाज़ में बोला ” बेटी? लेकिन संपादक साहब ने तो मुझे बताया ही नहीं कि डॉक्टर साहब की कोई बेटी भी है?”

महिला ने हल्के से मुस्कुराते हुए जवाब दिया- “वो शायद बताना भूल गए होंगे।”

ये सुनकर मनीष भी बनावटी हंसी दिखाता हुआ मुस्कुराया- “हां , हो सकता है। वैसे भी जनाब काफी भुलक्कड़ किस्म के हैं; वैसे घर के अंदर का तापमान सामान्य से कुछ अधिक कम नहीं लगता आपको?”

ये सुनकर सुषमा थोड़ी देर तक चुप रही और फिर अनायास ही बोली- “दरअसल मुझे एक बीमारी है, जिसके कारण मेरी त्वचा गर्मी और धूप के प्रति काफी संवेदनशील है। इसी वजह से घर में न तो धूप आ पाती है और न ही गर्मी। वैसे मां तो कुछ समय के लिए बाहर गयी हुई हैं, तो वो साक्षात्कार देने नहीं आ पायेंगी।”

ये सुनकर मनीष दुखी भी हुआ और थोड़ा हैरान भी, वो बोला- “लेकिन उन्होंने तो कहा था कि डॉक्टर रवि के जीवन के बारे में और अपनी शादी के बारे में वे आज बताएंगी।”

इस पर सुषमा धीर गंभीर आवाज़ में फिर मनीष से बोली- “मां नहीं हैं लेकिन…. उनके और पिताजी के बारे में जितना जानना है, मैं आपको बता दूंगी।” बेहद मासूमियत दिखाते हुए वो बोली।

मनीष ने भी मन ही मन सोचा- “चलो कुछ नहीं से कुछ भला, लेकिन इनकी माताजी के बारे में तो ये प्रचलित है कि वे कभी घर छोड़कर नहीं निकलतीं, खैर छोड़ो मुझे क्या? बस जल्दी से इंटरव्यू खत्म करके निकलूँ यहां से।”

फिर मनीष ने टेप रिकॉर्डर ऑन करके टेबल पर रख दिया और सवाल जवाब का सिलसिला शुरू किया।

मनीष- “तो सुषमा जी, आपके पिता डॉक्टर रवि दीक्षित भले ही अब इस दुनिया मे नहीं हैं लेकिन मेडिकल साइंस में उनके योगदान के कारण कई जानें बची हैं, इसके बारे में आपका क्या कहना है?”

सुषमा- मैं बहुत गर्व महसूस करती हूं कि मेरे पिता ने समाज के लिए इतना कुछ किया।

मनीष- रवि जी के सारे योगदानों के बारे में हम सब जानते ही हैं, लेकिन…क्या आप ये बताना चाहेंगी कि आपकी माताजी और पिताजी पहली बार कैसे मिले?

इस सवाल से सुषमा के चेहरे पर एक अजीब सी उदासी छा गयी और माथे पर चिंता की लकीरें गहराने लगीं।

मनीष- अगर आप नहीं बताना चाहती तो ठीक है, मैं समझ सकता हूँ कि ये आपका निजी मामला है और…..

सुषमा(बात बीच में काटकर)- मां ने मुझे अपने अतीत से जुड़ी एक एक बात बताई है, मैं बताऊंगी लेकिन ये कहानी थोड़ी लंबी है।

मनीष- मेरे पास वक्त भी बहुत है।

सुषमा ने कहानी सुनानी शुरू की- “ये बात आज से 32 साल पहले की है जब मेरे पिताजी बहुत ही ख्यातिप्राप्त डॉक्टर थे, लेकिन वे सामाजिक रूप से बिल्कुल मिलनसार व्यक्ति नहीं थे। हालांकि अब अगर आप ये कहेंगे कि सारे बुद्धजीवी ऐसे ही होते हैं तो आप गलत हैं क्योंकि मेरे पिता उन सबसे अलग थे। मां यानी कि मालिनी दीक्षित उन दिनों काम की तलाश में शिमला आयी हुईं थीं, अब उनका कोई ठौर ठिकाना तो था नहीं लेकिन किस्मत से पिताजी ने उस वक्त किसी अखबार में पेइंग गेस्ट के लिए इश्तिहार दिया था, जिसको देखकर मां इस घर में चली आयीं। जब उन्होंने दरवाजे को खटखटाया तो दरवाज़ा एक मोटी सी महिला ने खोला।”

उस महिला ने बड़ी ही बेहयाई से मां से पूछा- “क्या है?”

एक पल को तो माँ सहम सी गईं लेकिन फिर उन्होंने पूछा- “क्या आपने पेइंग गेस्ट के लिए इश्तिहार….” इतना सुनते ही उस महिला ने मां को अंदर बुला लिया, मां सामान सहित अंदर आ गईं। महिला ने थोड़ी देर मां को घूरा, मां उस समय खूबसूरत लगती भी थीं और वो मोटी महिला मां के कंधे तक भी नहीं पहुंच पा रही थी, उस महिला ने फिर एकदम रूखी आवाज़ में मां से कहा- “ये बगल वाला कमरा अब तुम्हारा है, किराया समय से दे देना।”
तभी मां की नज़र सीढ़ियों के पास बने ऊपर वाले कमरे की तरफ पड़ी जहां दरवाज़े के नीचे की तरफ से हल्का सफेद धुआं निकल रहा था, उन्होंने उस मोटी महिला से पूछा- “ये ऊपर डॉक्टर रवि जी का कमरा है?”

इसपर महिला बोली- “हां, लेकिन ऊपर गलती से भी मत जाना, डॉक्टर साहब कुछ न कुछ अजीबो गरीब अविष्कार करते रहते हैं, तुम व्यवधान डालोगी तो वो मुझपर नाराज़ होंगें, अब तुम सामान अपने कमरे में शिफ्ट कर सकती हो।”

इतना सुनते ही मां अपना सामान लिए नीचे वाले फ्लोर के कमरे में शिफ्ट हो गईं।

मनीष- माफ कीजियेगा लेकिन क्या आप बता सकती हैं कि वो कमरा कौन सा था? और वो महिला कौन थी जो पहले से इस घर मे थी?

सुषमा- जी बिल्कुल, ये जो आप सामने वाला कमरा देख रहे हैं, यही था मां का कमरा और उस मोटी महिला का नाम पल्लवी था जो किसी ज़माने में यहां की केयरटेकर थी, कुछ समय पहले उसकी रहस्यमयी हालातों में मौत हो गयी। पुलिस भी पता नहीं लगा पाई की कैसे कत्ल हुआ।

मनीष- ओह सुनकर बहुत बुरा लगा उनके बारे में।  अच्छा, अब आप आगे की कहानी सुना सकती हैं।

सुषमा- जी। मेरी माँ मुरादाबाद से यहां तक अकेले सफर तय करके आयी थी, अपना सब कुछ छोड़कर….यहां तक कि अपने पूर्व प्रेमी अमन को भी। तो जैसे ही अमन को पता चला कि मां यहां शिमला डॉक्टर रवि के घर आयी हुई हैं, तो वो भी पीछा करता हुआ यहां तक आ गया। वो रात का समय था और मां अपने कमरे में आराम कर रही थीं कि तभी अमन पाइप के सहारे चढ़कर मां के कमरे में घुस आया, उसने शायद खिड़की से मां को देख लिया होगा। मां ने उससे कुछ देर बहस की लेकिन जब बात नहीं जमी तो अमन हाथापाई पर उतर आया। जिसकी वजह से मां घबराकर अपने कमरे से निकलकर ऊपर वाले कमरे की तरफ भागीं, पीछे अमन भी भागा और उसने मां को पकड़ लिया लेकिन तभी ऊपर वाले कमरे का दरवाजा खुला और एक हाथ ने अमन को मां से अलग खींच लिया। दोनों ने देखा तो सामने खड़े थे पिताजी डॉक्टर रवि दीक्षित हल्की सी सफेद त्वचा वाले, हट्टे कट्टे नौजवान, उनके चेहरे पर एक अलग ही सभ्यता नज़र आती थी।

उन्होंने गंभीर लेकिन शांत आवाज़ में अमन से कहा- “चुपचाप यहां से निकल जाओ और किसी को चोट नहीं पहुंचेगी।”

अमन उनकी चेतावनी को अनसुना करते हुए मां की तरफ बढ़ा लेकिन पिताजी के ज़ोरदार मुक्के ने उसे सीढ़ियों से नीचे गिरा दिया, उसके बाद वो वापिस उठा ज़रूर लेकिन घर से बाहर भागने के लिए।

मां ने यह देखकर राहत की सांस ली और उन्होंने पहली बार डॉक्टर रवि को देखा, उनके व्यक्तित्व ने मां का मन मोह लिया था।

पिताजी बहुत ही सभ्य आवाज़ में मां से बोले- “अब आपको बिल्कुल भी फिक्र करने की ज़रूरत नहीं, वो वापस नहीं आएगा और अगर आ भी गया तो उसके लिए हम तैयार रहेंगे।
“वैसे मैं क्षमा चाहता हूं कि मैं आपसे मिल नहीं पाया, मैं डॉक्टर रवि दीक्षित। मुझे पल्लवी में बताया था कि आप आ गयी हैं लेकिन मैं अपने अविष्कारों में इतना बिजी था कि….”

मां मुस्कुराकर बोली- “…कि आपको पूरे दिन में बाहर आने का मौका नहीं मिला?”

डॉक्टर रवि मुस्कुराए- “दरअसल बात ये है मालिनी कि मेरी त्वचा धूप और गर्मी के प्रति काफी संवेदनशील है इसीलिए दिन के वक्त मेरा ज़्यादा देर तक बाहर रहना ठीक नहीं है।”

लेकिन मां ने बात बीच मे काट दी।

मालिनी- “कोई बात नहीं डॉक्टर साहब, मैं समझती हूँ कि आपको समय नहीं मिला होगा, इसकी भरपाई एक चाय से हो सकती है।”

पिताजी मुस्कुराकर बोले- “हाँ… हाँ… बिल्कुल, भरपाई तो करनी ही पड़ेगी।”

उस दिन मां ने डॉक्टर रवि और अपने लिए चाय बनाई लेकिन चाय खत्म होने के बाद भी उनकी चर्चा खत्म नहीं हुई, कुछ दो घंटे वो बैठकर बात करते रहे लेकिन तभी पिताजी की नज़र घड़ी पर गयी और वो बोले “बहुत देर हो गयी है मालिनी जी, अब हमको अपने अपने कमरे में वापस चलना चाहिए।”

फिर वे दोनों अपने अपने कमरे में चले गए लेकिन मां के दिमाग से उनका ख्याल नहीं गया। मां सोने चली गईं लेकिन रात के लगभग तीन बजे उनकी आंख खुल गयी, ऊपर के फ्लोर पर ड्रिल चलने जैसी आवाज़ आ रही थी,मां को बड़ा अजीब लगा तो वो ऊपर वाले कमरे की तरफ बढ़ीं। डॉक्टर रवि दीक्षित ने दरवाज़ा खुला रखा था, जब मां ने दरवाज़ा खोला तो तापमान में एक भारी गिरावट महसूस की लेकिन जब कमरे के अंदर उनकी नज़र पड़ी तो उनकी रूह तक कांप गयी।”

इतना बताकर सुषमा चुप हो गयी।

मनीष- फिर….फिर क्या हुआ? क्या देखा उन्होंने? और आपकी ये त्वचा वाली बीमारी क्या आपके पिताजी के कारण आपको मिली है?

सुषमा- मैं ज़रूर बताऊंगी लेकिन पहले अपना टेप रिकॉर्डर बन्द कीजिये, अगर आप जानना ही चाहते हैं तो मैं ये बात ‘ऑफ द रिकॉर्ड’ जाकर बताऊंगी।

अब मनीष और ज़्यादा बेचैनी हुई। उत्सुकतावस आगे की कहानी जानने के लिए उसने मेज पर सामने रखा टेपरिकॉर्डर बन्द कर दिया।

मनीष- अब बताइए, क्या बात हुई थी?

सुषमा(ठंडी आह भरकर)- मां ने देखा कि अमन एक बिस्तर से रस्सियों द्वारा बंधा हुआ था, उसका पेट नीचे की तरफ था और पीठ पर डॉक्टर रवि ड्रिल चला रहे थे। साथ मे पल्लवी भी मौजूद थी। माँ ये भयावह दृश्य देखकर बहुत घबरा गई और चीख पड़ी जिससे पल्लवी और रवि का ध्यान उसकी तरफ चला गया। मां आनन फानन में बहुत जल्दी उस कमरे से निकली लेकिन सीढ़ियों से उनका पैर फिसल गया और वो ज़मीन पर गिरकर बेहोशी की गर्त में चली गईं, जब उनको होश आया तो वे डॉक्टर रवि के कमरे में थीं और रवि उनके पास खड़े थे।

वो चीख मारकर उठ खड़ी हुई- “तुमने…. त्….त…तुमने… उसे मार दिया!”

पिताजी अपनी गंभीर और शांत आवाज़ में बोले- “शांत हो जाओ मालिनी, मैंने ये सब तुम्हारे लिए ही किया है।”

इसपर मां बोलीं- “म..मेरे लिए? ये क्या कह रहे हैं आप?”

पिताजी ने उनको पहले बैठाया और फिर बताना शुरू किया- “अब जो मैं तुमको बताने जा रहा हूँ मालिनी वो तुमको बहुत अजीब लगेगा लेकिन मुझे लगता है कि अपना ये राज़ मैं तुमको बता सकता हूँ।”

तभी पल्लवी कमरे में आ गयी- “रुकिए रवि जी, मुझे लगता है कि इसको कुछ भी बताना ठीक नहीं रहेगा। हमारे लिए समस्या बढ़ जाएगी।”

रवि जी उसकी तरफ मुड़े और अपने क्रोध को दबाते हुए बोले- “यहां से ….बाहर जाओ।”

पल्लवी को दूसरी बार बोलने की ज़रूरत नहीं पड़ी, वो खुद कमरे से बाहर चली गयी।

पिताजी फिर मां की तरफ मुड़े और पूछा- “तुम्हें क्या लगता है मालिनी कि मेरी उम्र क्या होगी?”

मां घबराई सी आवाज़ में बोलीं-  “पता नहीं, शायद ….शायद मेरे ही हमउम्र हैं आप।”

इस जवाब पर पिताजी मुस्कुराए और बोले- “तो तुम्हें ये जानकर झटका लगने वाला है कि मेरी उम्र 150 साल है।”

मां ने आंखें फाड़कर डॉक्टर रवि को देखा, जो कहीं से भी 30 से ऊपर के नहीं लग रहे थे, बस उनकी त्वचा थोड़ी सफेद थी।

पिताजी ने आगे बताना शुरू किया- “मैं अपने कॉलेज के दिनों से पढ़ाई में बहुत तेज़ था, मुझे मानव शरीर की संरचना जानने में बहुत दिलचस्पी थी। दिन दिन भर पढ़ता देखकर मेरे दोस्त मुझे पागल कहते थे। एक दिन मेरे पिता और माता की मृत्यु एक कार एक्सीडेंट में हो गयी, तब मैंने नई नई प्रैक्टिस शुरू ही की थी। उस दिन में एक आंसू नहीं रोया बल्कि मेरे अंदर एक बदलाव आया, एक उत्सुकता बढ़ी मानव शरीर को और ज़्यादा जानने की….ज़िंदगी और मौत को जानने की और तब मुझे पता चला इस प्रयोग के बारे में।”

अब तक मां को भी पिताजी की बातों में दिलचस्पी होने लगी थी- “कैसा प्रयोग?”

पिताजी ने गहरी सांस छोड़ते हुए बताया- “हम सबकी रीढ़ की हड्डी में एक spinal fluid(मेरुद्रव) होता है, अगर हम एक ठंडे वातावरण में किसी अन्य व्यक्ति का ताजा spinal fluid अपने शरीर में एक निश्चित मात्रा में इंजेक्ट करें तो हम…खुद को “अमर” बना सकते हैं, नश्वरता को काबू कर सकते हैं लेकिन हर चीज़ की एक कीमत होती है इसकी भी है।

“शुरुआत में मैंने अस्पताल के मुर्दों से spinal fluid चोरी करना शुरू किया, वो भी ताज़ा मुर्दों से क्योंकि मौत के 2 घंटे बाद spinal fluid बेकार हो जाता है और ये प्रयोग मेरे ऊपर सफल भी रहा लेकिन इस अविष्कार के कुछ…. साइड इफेक्ट्स भी रहे जैसे अगर मैं धूप और गर्मी के संपर्क में कुछ देर रहूं तो त्वचा पर फफोले पड़ जाते हैं और अगर ज़्यादा देर तक रहूं तो शायद…..मर भी सकता हूँ। पर ये मेरे जीवन में पहली बार था कि मैंने किसी ज़िंदा व्यक्ति को बांधकर उसका spinal fluid लिया हो….और ये मैंने सिर्फ तुम्हारे लिए किया ताकि ये तुमको दोबारा परेशान न कर सके।”

मां अब तक मंत्रमुग्ध होकर पिताजी की सारी बातें सुन रही थी, तभी पिताजी की आवाज़ से उनकी तंद्रा भंग हुई- “क्या सोच रही हो मालिनी? तुम मुझे कानून के हवाले कर सकती हो लेकिन मुझे शक है कि धूप में बाहर निकलने पर मैं ज़्यादा देर तक जीवित बचूंगा।”

इस पर मां बोलीं- “उसकी कोई ज़रूरत नहीं है, मैं समझती हूं कि आपने ऐसा क्यों किया लेकिन अब हम अमन की लाश का क्या करें?”

पिताजी मुस्कुराकर बोले- “इसकी चिंता तुम मत करो, मैं उसकी लाश का इंतज़ाम कर दूंगा।”

उस घटना के बाद सब सामान्य हो गया, जैसे कभी कुछ हुआ ही नहीं था। यही वो समय था जब मां की किसी बेकरी के स्टोर में नौकरी भी लग गयी थी, वो सारे दिन काम करतीं और शाम को पिताजी के साथ अपने सारे अनुभवों को साझा करतीं। उनकी नजदीकियां दिन पर दिन बढ़ती ही चली जा रही थीं और एक दिन ऐसा भी आया जब पिताजी ने मां को शादी के लिए प्रपोज़ कर दिया। उस दिन मां एकदम हक्कीबक्की रह गयी, जब उन्होंने पिताजी के मुंह से सुना- “मैं तुमसे प्यार करता हूँ मालिनी और शादी करना चाहता हूं।”

मां के मुंह से शब्द नहीं निकल पा रहे थे-  “वो, मैं…”

तभी पिताजी उनकी बात काटकर बोले- “मैं समझ सकता हूँ मालिनी की कितना मुश्किल है, एक ऐसे व्यक्ति के साथ रहना जो सालों पुरानी ज़िंदा लाश से अधिक कुछ भी नहीं, बात ये है कि जब से मैंने होश संभाला है, तब से जीव विज्ञान की में नई नई खोजों और नई नई संभावनाओं की खोज में इस कदर रमा हुआ था कि अपनी व्यक्तिगत ज़िंदगी के लिए समय ही नहीं मिला, ऊपर से जब माता पिता की मौत हुई तो मैं पूरी तरह से टूट गया था और मानसिक रूप से विक्षिप्त होने के कगार पर पहुंच गया था। अब मैं नश्वर नहीं रहा, मैं एक चलता फिरता सांस लेता ज़िंदा प्रेत बनकर रह गया हूँ तो अगर तुम मुझे मना करोगी तो मैं समझ सकता हूँ कि तुम ऐसा क्यों करोगी, कोई ज़ोर ज़बरदस्ती नहीं है।”

इस पर मां पहले तो हल्का सा मुस्कुराई और कहा- “आप कहते हैं कि आप ज़िंदा प्रेत हैं लेकिन इस ज़िंदा प्रेत ने मेरा मन बहुत पहले ही मोह लिया था। जिस तरह से इतने दिनों तक आपने मुझसे बातें की, मुझे समझा, मुझे नहीं लगता कि ऐसा व्यक्ति कहीं भी मिल पायेगा। मैं भी आपसे शादी के लिए ही पूछना चाहती थी लेकिन कभी समझ नहीं आया कि कैसे आपसे बात करूँ इस बारे में।”

वो पल शायद उन दोनों के जीवन का सबसे खूबसूरत और यादगार पल था, जैसा कि उन्होंने मुझे बताया। बाद में जब उनकी शादी हुई तो वो बस एक फॉर्मेलिटी के तौर पर हो गयी जिसमें कोर्ट में कुछ ही समय में निपटा दिया गया क्योंकि पिताजी अपनी “विशिष्ट” स्थिति के कारण केवल रात में ही बाहर निकल सकते थे। फिर दोनों हंसी खुशी रहने लगे।

ये कहानी सुनाते सुनाते सुषमा भी कहीं खो सी गयी थी लेकिन मनीष की एक आवाज़ से उसका ध्यान भंग हो गया।

मनीष- अगर आप इतना कुछ ” ऑफ द रिकॉर्ड” जाकर बता ही रही हैं तो एक बात और बता दीजिए….आखिर डॉक्टर रवि दीक्षित की मृत्यु कैसे हुई?

सुषमा- आपको जितना जानना था, आप जान चुके हैं। अब आप यहां से जा सकते हैं।

मनीष- प्लीज, देखिए ये बात सिर्फ आपके और मेरे बीच मे ही रहेगी।
सुषमा- मैंने कहा न….अब आप जा सकते हैं।

मनीष- तो फिर ठीक है, डॉक्टर रवि का राज़ दुनिया के सामने आने से कोई नहीं रोक पायेगा क्योंकि मैंने टेप रिकॉर्डर बन्द करने का सिर्फ नाटक किया था, बन्द नहीं किया था।

सुषमा(हैरानी से)- क्या? तुम पत्रकारों का तो भरोसा कभी करना ही नहीं चाहिए! पर क्या तुम ये गारंटी दे सकते हो कि अगर मैं तुमको उनकी मौत के बारे में बता दूं तो डॉक्टर रवि का है राज़ तुम दुनिया को नहीं बताओगे?

मनीष- इतना भरोसा रखिये मैडम।

सुषमा- भरोसा करके ही तो पछता रही हूँ। खैर, फिर माता पिता की शादी हो गयी और जल्द ही मां को ये पता चला कि वे गर्भवती हैं। घर में खुशी की लहर दौड़ गयी लेकिन इस दौरान एक अजीब बात भी हुई…पल्लवी शादी से पहले गायब हो गयी और काफी समय तक लौट कर नहीं आयी। फिर दोनों लोगों ने एक और नौकर रख लिया जिसका नाम था राजू, राजू बड़ा ही अच्छा व्यक्ति है।

मनीष- वो अभी भी है?

सुषमा- हां, अभी बाहर गया है, आता ही होगा। खैर, उनकी ज़िंदगी हंसी खुशी चल रही थी कि अचानक से पल्लवी एक रात बेहद क्रोध में घर मे घुस आई। तब मां पिताजी नीचे वाले बरामदे में ही बैठे थे, जब उन्होंने देखा कि पल्लवी के हाथ में बंदूक है तो वे बेहद घबरा गए।

पिताजी एकदम सकपका गए थे- “पल्लवी ये क्या पागलपन है? बंदूक लेकर क्या कर रही हो तुम यहां?”

पल्लवी तो जैसे पागल हो चुकी थी, वो चिल्ला उठी- “तू चुप रह रवि दीक्षित! इतने दिन तक तेरा साथ दिया मैंने, ताज़े मुर्दों का spinal fluid चुकराकर तेरी अनश्वरता, अमरता को बनाये रखने में मदद की और बदले में तूने मुझसे इतना बड़ा धोखा किया? शादी किसी और से कर ली? अब तुझे इसकी भरपाई करनी होगी, मैं इस लड़की को मार दूंगी। तब तू फिर से अकेला हो जाएगा।” कहकर पल्लवी ने मां की तरफ बंदूक तान दी।

पिताजी ने पल्लवी को समझाने का प्रयास किया- “देखो मुझे तुमसे कोई लगाव नहीं था, पल्लवी। अब हमें और कोई समस्या नहीं चाहिए बंदूक नीचे करो।”  लेकिन पल्लवी के कान पर तो जैसे उनकी आवाज़ पड़ ही नहीं रही थी, उसने गोली चला दी।

लेकिन वो गोली मां तक पहुंची ही नहीं, उससे पहले ही पिताजी ने उस गोली को अपने सीने पर झेल लिया। पल्लवी और मां दोनों ही तुरंत पिताजी के पास दौड़ पड़ीं, पिताजी ज़मीन पर धराशायी अपनी बची खुची सांसें गिन रहे थे।

मां के आंसू रुक ही नहीं रहे थे, वो बड़ी मुश्किल से बोल पायीं- “ये..ये क्या किया आपने?”

जवाब में पिताजी ने अपनी बची खुची आखिरी साँसों की ताकत से कहा- “मैं अपनी ज़िंदगी बहुत जी चुका। बल्कि जितनी जीनी चाहिए थी उससे ज़्यादा ही जी चुका हूं लेकिन भगवान ने मेरी उम्र शायद तुमको दे दी है।”

मां के समझ मे नहीं आया कि ये उन्होंने क्यों कहा तो उन्होंने अपने आंसुओं को काबू में करके फिर पूछा- “आ..आप ऐसा क्यों कहा रहे हैं?”

पिताजी हल्का सा मुस्कुराए और उत्तर दिया- “क्योंकि…क्योंकि तुमने मुझसे शारीरिक संबंध स्थापित किया, जिससे मेरे शरीर का अमरता और मेरे शरीर का श्राप दोनों तुम्हारे शरीर मे जा चुके हैं। मैंने कुछ समय पहले तुम्हारा ब्लड टेस्ट किया था, उसकी रिपोर्ट से मुझे पता चला, सोचा था कि जल्द ही तुमको बात दूंगा लेकिन……” इतना कहते ही पिताजी इस दुनिया से चले गए।

अब तक मां को समझ मे भी नहीं आया था कि वो क्या करे , तब तक क्रोधित पल्लवी ने फिर से बंदूक उठाकर मां पर तान दी और चिल्लाकर बोली- “तेरी वजह से मैंने अपना प्यार भी खोया साथ ही अमर होने का इकलौता मौका भी खो दिया, जब मैं नश्वर रह गयी तो तू भी अमर जीवन नहीं जियेगी।”

मां ने उसे बहुत समझाने की कोशिश की, अपने पेट में पल रहे बच्चे की दुहाई भी दी लेकिन पल्लवी नहीं मानी पर सही मौके पर राजू पीछे से फावड़ा लेकर आ गया और पल्लवी के सर पर जोरदार ढंग से प्रहार किया। पल्लवी ने उसी वक्त दम तोड़ दिया, फिर राजू उसकी लाश को सड़क के किनारे छोड़ आया ताकि ये एक एक्सीडेंट लगे।

सुषमा के इस भयानक विवरण के बाद पूरे घर मे सन्नाटा छा गया, मनीष को समझ में ही नहीं आया कि वो आखिर क्या बोले।

मनीष- त..तुमने ये बात पुलिस से छिपाई रखी?

सुषमा- पुलिस को ये बताती तो माँ पिताजी से जुड़ी हर एक बात बतानी पड़ती, जो कि मैं…

मनीष(बात बीच मे काटकर)- बकवास बन्द करो, मुझे क्या तुमने बेवकूफ समझ रखा है। तुम्हें क्या लगता है कि इतनी देर में मुझे पता नहीं चल गया होगा कि तुम सुषमा नहीं बल्कि डॉक्टर रवि की बीवी “मालिनी दीक्षित” हो जिसे डॉक्टर से अमरता प्राप्त हो चुकी है। जिस प्रकार से तुमने अपनी कहानी बताई उसी से मुझे शक हो रहा था कि तुम मालिनी हो लेकिन यकीन तो तब हुआ जब मैंने गौर किया कि तुमने इतने सारे ढीले कपड़े क्यों पहने हैं…..क्योंकि तुम आज तक गर्भवती हो, तुम्हें अमरता तो मिल गयी लेकिन किसी सुषमा का जन्म आज तक हुआ ही नहीं, इतने वर्षों से तुम्हारा बच्चा तुम्हारे पेट मे ही है।

मालिनी में चेहरे पर अपना राज़ खुलने की कोई चिंता दिखाई नहीं दी। वो तो उल्टा मुस्कुरा रही थी।

मनीष- बहुत हंसी आ रही है? अभी जब दुनिया को तुम्हारी सच्चाई पता चलेगी तब देखता हूँ कि ……

मनीष को अचानक बोलते बोलते चक्कर आने लगे, वो लड़खड़ाने लगा।

मनीष(लड़खड़ाती ज़ुबान से)- च..चाय में क्या मिलाया था तूने!
मालिनी(मुस्कुराते हुए)- बेहोशी की दवा।

थोड़ी ही देर में मनीष बेहोश हो गया, ठीक उसी वक्त नौकर राजू भी घर के अंदर आ गया।

राजू- एक नया शिकार मेमसाहब?

मालिनी- हम्म! इसको ऊपर वाले कमरे में ले जाओ, वहीं में इसका spinal fluid निकालकर अपने शरीर मे इंजेक्ट कर लूंगी, मेरे रवि ने मुझे अमरता का जो वरदान दिया है उसे मैं व्यर्थ नहीं जाने दे सकती।

राजू मनीष के बेहोश शरीर को उठाकर ऊपर की तरफ ले गया जहां आज भी डॉक्टर रवि का कमरा उसी तरह से बना हुआ था। मालिनी अपने फूले हुए पेट पर हाथ फेरती हुई बोली ” सुषमा मेरी बच्ची, तुम्हारा जन्म नहीं हुआ तो क्या हुआ, तुम्हें ज़िंदा रखने की ज़िम्मेदारी मेरी है। अब मेरे साथ साथ तुम भी जियोगी…..शायद उस दुनिया के अंत तक।”

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Written by  on October 3, 2019

रवि पारीक
2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती के दिन WAR फिल्म रिलीज हुई। फिल्म के ट्रेलर में रितिक रोशन और टाइगर श्रॉफ का भरपूर ऐक्शन देखकर हमने भी देख डाली मूवी वॉर और इसके लिए दिन मुकर्रर हुआ बुधवार। अगर आपने पहले ही दिन मूवी देख ली है तो अब हम आपकी कोई मदद नहीं कर सकते हैं। टिकट बुक नहीं कराया है तो दुनिया में और भी काम हैं, वे कर लीजिए। अगर टिकट करा लिया है लेकिन देखी नहीं है तो 4 घंटे पहले टिकट कैंसल कराने पर 70% रिफंड और जीवन भर का गिल्ट वापस मिल सकता है। फिल्म वॉर देखने जा रहे हैं तो पहले ये पॉइंट्स पढ़ लीजिए फिर फैसला आपका। करते हैं शुरू वॉर का फनी लेकिन एकदम असली रिव्यू…
1- फिल्म में खालिद बने टाइगर श्रॉफ ने बॉलिवुड की एक बड़ी कमी को पूरा कर दिया है। टाइगर में काफी पॉटेंशियल है। ऐक्टिंग करने का नहीं बल्कि बॉलिवुड में आइटम बॉय बनने का। टाइगर श्रॉफ की ऐक्टिंग देखकर आप यही कहेंगे कि अब समय आ गया है कि टाइगर छोड़ दें… ऐक्टिंग नहीं बल्कि सांस लेना।

2- जब-जब टाइगर श्रॉफ डायलॉग डिलिवरी करते हैं। आप सीट से उठ जाते हैं। ताली या सीटी बजाने के लिए नहीं बल्कि अपने से आगे वाले शख्स को नीचे बैठाने के लिए जो पहले ही टाइगर को भला-बुरा कहने के लिए सीट से खड़ा हो चुका है।

3- वॉर मूवी देखते हुए आप फिल्म में एकदम घुस जाते हैं। यह फिल्म आपको वॉर का रियल एक्स्पीरियंस देती है। फिल्म देखते हुए आपके दिल और दिमाग में भी एक वॉर चलती है कि मूवी पूरी देखी जाए या फिर बीच में ही छोड़ दी जाए।

4- फिल्म का म्यूजिक एकदम धांसू है। यही फिल्म की खूबी है। फिल्म के बीच में आप एकदम गला फाड़कर डायरेक्टर को गाली देंगे तो भी आपके पास वाले बैठे शख्स को पता नहीं चलेगा।

5- फिल्म का सबसे बड़ा अडवांटेज है कि पूरी फिल्म के दौरान आप फिल्म को प्रेडिक्ट नहीं कर पाएंगे। यहां तक कि आप खुद भी फिल्म के पहले हाफ में सोचते हैं कि क्या हो रहा है और दूसरे हाफ में सोचेंगे कि क्यों हो रहा है?

6- वाणी कपूर आती हैं और चली जाती हैं। 3 घंटे की फिल्म में उनका 10 मिनट का रोल है। इन 10 मिनट में वह थोड़ी देर इमोशनल भी होती हैं। उन्हें इमोशनल होता देख आपको लगता है कि उन्हें 10 मिनट भी ज्यादा दे दिए गए।

7- रितिक की ऑन स्क्रीन पर्जेंस एकदम अच्छी है। हर बार स्क्रीन पर एंट्री के मामले में रितिक बेस्ट हैं। यहां तक कि हर मामले में रितिक ने टाइगर को पीछे छोड़ दिया है। चाहे बात ओवर ऐक्टिंग करने की ही क्यों ना हो।

8- यह फिल्म एकदम देशभक्ति से भरी हुई है। फिल्म शुरू होने के बाद आप एक बार तो जोश से भर जाते हैं और आपको गूजबंप होता है… और वह तब जब फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजता है। इसके अलावा आप फिल्म में सिर्फ ठंडे पड़े रहेंगे।

9- फिल्म का क्लाइमेक्स इसकी सबसे बड़ी खास बात है। अंत तक जाते-जाते आप खुश होते हैं कि फाइनली फिल्म खत्म हो रही है। तभी क्लाइमेक्स आता है और एंड में आकर आपको पता चलता है कि मूवी का दूसरा पार्ट भी आएगा तो आपको सदमा लग सकता है।

10- यह फिल्म किसी ट्रैवलर का यूट्यूब विडियो लगता है। आप गाजियाबाद में बैठकर मोरक्को, इराक, सिडनी, पुर्तगाल से लेकर आर्कटिका तक घूम आते हैं। फिल्म में एक कमी रह गई और अगर फिल्म के किसी एक सीन में ‘Some Where in Balochistan’ लिख दिया जाए तो फिल्म पूरी वेब सीरीज का मसाला है।

11- अंत में बात करें फिल्म की अच्छी बातों की तो फिल्म की सबसे अच्छी बात है कि फिल्म 2 घंटे 40 मिनट में खत्म हो जाती है। इसके अलावा अगर रेटिंग की बात करें तो फिल्म को दो स्टार मिलने चाहिए। वे उसमें पहले से हैं रितिक रोशन और टाइगर श्रॉफ। इसके अलावा यह फिल्म कोई तीसरा स्टार डिजर्व नहीं करती है।

एंड में सिर्फ इतना ही कि भइया, वॉर एक ऐसी फिल्म है कि अगर अहिंसा के पुजारी गांधी जी भी इस मूवी को देख लेते तो उनका हाथ टाइगर श्रॉफ पर उठ जाता! बिना किसी लॉजिक के ऐक्शन सीन्स इस फिल्म को नीचे की ओर ले जाते हैं। अगर ऐक्शन ही देखने हैं तो साऊथ की मूवी देख लीजिए, डांस देखना है तो हरियाणवी मूवी देख लीजिए, आइटम सॉन्ग्स देखने हैं तो भोजपुरी फिल्म देख लीजिए। आगे आप खुद समझदार हैं।

 

 

Source https://navbharattimes.indiatimes.com/jokes/funny-news/war-movie-funny-and-hindi-review-starring-tiger-shroff-and-hrithik-roshan/articleshow/71418442.cms

Chhattisgarh District Hospital Kondagaon Recruitment : जिला अस्पताल कोंडागांव में 12वीं पास सफाई सुपरवाइजर भर्ती

Written by  on September 10, 2019
Chhattisgarh District Hospital Kondagaon Recruitment 2019 : जिला अस्पताल कोंडागांव छत्तीसगढ़ ( Chhattisgarh District Hospital Kondagaon ) द्वारा विभाग में रिक्‍त पदों की भर्ती के लिए Jobskind Employment News जारी किया गया है। Chhattisgarh District Hospital Kondagaon Recruitment 2019 पर आवेदन करने के इच्छुक उम्मीदवार जो इन पदों के लिए निर्धारित शैक्षणिक योग्यता एवं अन्य अर्हताओं की पूर्ति करते हों, वे निर्धारित अंतिम तिथि 18-08-2019 तक विभाग को अपना आवेदन प्रस्‍तुत कर सकते हैं। इस भर्ती सूचना के अंतर्गत अन्य सभी विवरण जैसे शैक्षणिक योग्‍यता, आयु सीमा, आवेदन प्रक्रिया, अनुभव एवं चयन प्रक्रिया की जानकारी का अवलोकन आप इस पेज में कर सकते हैं। Jobskind.com पर प्रतिदिन रोजगार सूचनाओं के नवीन अपडेट प्रदान किये जाते हैं, अत: डेली इस वेबसाइट पर विजिट कर अपने क्षेत्र की रोजगार सूचनाओं से अपडेट रहें।

Chhattisgarh District Hospital Kondagaon Recruitment Detail 2019

विभाग/संस्था /संगठन का नाम (Name of Department) :-   जिला अस्पताल कोंडागांव छत्तीसगढ़ { Chhattisgarh District Hospital Kondagaon }
भर्ती परीक्षा के नाम (Name of the Examination) :- सफाई सुपरवाइजर
भर्ती पदों के नाम (Name of Posts) :- सफाई सुपरवाइजर
पदों की संख्या (Number of Posts) :- कुल 01 पद।
पद की श्रेणी (Category of Posts) :– संविदा ।
सरकारी नौकरी प्रकार (Type of Govt Jobs) :- Chhattisgarh District Hospital Kondagaon Recruitment

वेतनमान (Pay Scale) –  इस रोजगार सूचना के अंतर्गत चयनित उम्‍मीदवारों को विभाग द्वारा निर्धारित 11000 प्रतिमाह का वेतनमान मिलेगा। इसके अतिरिक्‍त विभाग द्वारा समय-समय पर प्रदान किये जाने वाले अन्‍य भत्‍ते भी प्रदान किया जाएगा। वेतनमान की जानकारी के लिए आप विभागीय नोटिफिकेशन देखे।

शैक्षणिक योग्यता एवं अनुभव  ( Educational Qualification & Experience ) :- आवेदक के पास किसी मान्‍यता प्राप्‍त संस्‍था/बोर्ड/विश्‍वविद्यालय से 12वीं पास एवं स्वच्छता निरीक्षक प्रमाण पत्र/डिग्री/पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री अथवा समकक्ष अर्हता होनी चाहिए। इसके अतिरिक्‍त आवेदक के पास संबंधित क्षेत्र में कार्य करने का अनुभव होना चाहिए। शैक्षणिक योग्‍यता संबंधी सटिक जानकारी के लिए आप नीचे दिये गये लिंक से विभागीय नोटिफिकेशन डाउनलोड करें।

आयु सीमा (Age Limit ) :-  Recruitment 2019 भर्ती सूचना के अंतर्गत आवेदन करने के लिए आवेदक की आयु निम्‍नानुसार होनी चाहिए –
  • अधिकतम आयु –  35 वर्ष।
  • न्‍यूनतम आयु –  21 वर्ष।
* आयु में छूट की जानकारी के लिए विभागीय विज्ञापन में दिये गये निर्देश देखें।

आवेदन कैसे करें ( How to Apply ) :-  Chhattisgarh District Hospital Kondagaon Recruitment Application Form 2019 भरने के लिए आवेदक को निर्धारित प्रारूप में आवेदन करना होगा और विभाग को अंतिम तिथि या उससे पहले तक प्रस्‍तुत करना होगा।

महत्वपूर्ण तिथि एवं कार्यक्रम  ( Important Date & Schedule of  Recruitment 2019 ) :-
  • विभाग में आवेदन करने की प्रारंभिक तिथि – 11-08-2019
  • विभाग में आवेदन करने की अंतिम तिथि – 18-08-2019

चयन प्रक्रिया ( Selection Process ) :-  आवेदकों के चयन हेतु विभाग द्वारा प्राप्‍त आवेदन के आधार पर लिखित परीक्षा/ दस्‍तावेज सत्‍यापन/कौशल परीक्षा/फिजिकल टेस्‍ट/ साक्षात्‍कार/समूह चर्चा जो भी लागू हो के लिए बुलाया जायेगा। जिसमें प्रदर्शन के आधार पर उम्‍मीदवार का चयन किया जायेगा।

बाहरी लिंक ( External Link ) :-  विभागीय विज्ञापन एवं आवेदन फार्म नीचे दिये गये लिंक से प्राप्‍त करें।
विभागीय विज्ञापन एवं आवेदन फार्म

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नोट (Note) –
सभी उम्मीदवारों से अनुरोध है कि वे उपयुक्त पद के लिए पात्रता संबधी निर्देशों का अवलोकन भली-भांति कर लें एवं किसी भी विज्ञापन पर आवेदन करने से पहले अपने समझ से काम लेवें। कृपया सटिक एवं अधिक जानकारी के लिए विभागीय नोटिफिकेशन या विज्ञापन देखें। किसी भी स्थिति में विभागीय विज्ञापन में दिये गये निर्देश ही सही माने जावेंगे।

‘‘विस्तृत विज्ञापन डाउनलोड करने के लिए उपर दिये गये बाहरी लिंक (External Link) पर क्लिक करें अथवा विभागीय वेबसाइट पर जायें।’’

निवेदन (Request) –
आप सभी से निवेदन है कि इस Job Link को अपने अधिक से अधिक दोस्तों एवं वाट्स एप गुप तथा अन्य सोशल नेटवर्क जो भी आप प्रयोग करते हों में शेयर करें और एक अच्छा रोजगार पाने में उनकी मदद करें।
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Arun Jaitley Dies: वित्त मंत्री रहते जेटली ने किए ये 10 बड़े काम

Written by  on August 25, 2019
Arun Jaitley Dies: वित्त मंत्री रहते जेटली ने किए ये 10 बड़े काम
पूर्व वित्त मंत्री और बीजेपी के कद्दावर नेता अरुण जेटली (Arun Jaitley) का शनिवार की दोपहर करीब 12 बजे निधन हो गया। जेटली ने 2014 से 2019 तक देश के वित्त मंत्री रहते कई बड़े कदम उठाए

नई दिल्ली (बिजनेस डेस्क)। पूर्व वित्त मंत्री और बीजेपी के कद्दावर नेता अरुण जेटली (Arun Jaitley) का शनिवार की दोपहर करीब 12 बजे निधन हो गया। वे बीते कई दिनों से नई दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती थे। जेटली ने 2014 से 2019 तक देश के वित्त मंत्री रहते कई बड़े कदम उठाए। जानिए जेटली के ऐसे ही कुछ योगदान के बारे में…

वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी): जेटली जब वित्त मंत्री थे, तब 1 जुलाई 2017 से जीएसटी लागू किया गया था। जीएसटी का उद्देश्य राज्य और केंद्र के अप्रत्यक्ष करों को मिलाकर भारत की जटिल अप्रत्यक्ष कर संरचना को आसान बनाना है।

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बैंकों का विलय: सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB) की दशा में सुधार के लिए जेटली के वित्त मंत्री रहते छोटे बैंकों का बड़े बैंकों में विलय कर दिया गया। इसके तहत बैंक ऑफ बड़ौदा, देना बैंक और विजया बैंक का विलय हुआ।

जन धन योजना: इसकी शुरुआत 2014 में की गई थी, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देना था। इसके तहत जीरो बैलेंस बैंक अकाउंट खातों की शुरुआत, लोन, बीमा और पेंशन के पहुंच में वृद्धि जैसे उपाय किए गए। इसका मकसद गरीबों के खातों में सीधे सब्सिडी भेजना था।

इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC): हाल के दिनों में भारतीय अर्थव्यवस्था में बैंकिंग घोटाले मुख्य तौर पर सामने आए। इन घटनाओं ने अर्थव्यवस्था को बड़ा नुकसान पहुंचाया। केंद्र सरकार ने बैंकिंग व्यवस्था में ढांचागत सुधार करते हुए 2016 मे इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (आईबीसी) कानून को पारित किया था आज इस कानून की वजह से कर्ज लेकर उन्हें डकार जाने वाली कंपनियां और पूंजीपति में एक डर का माहौल है।

LTCG टैक्स: लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स को एक विवादास्पद कर माना गया, यह कर अधिग्रहण की तारीख से एक वर्ष की न्यूनतम अवधि के लिए आयोजित शेयरों, अचल संपत्ति और शेयर-ओरिएंटेड प्रोडक्ट जैसे परिसंपत्तियों से उत्पन्न लाभ पर लगाया गया था। तत्कालीन वित्त मंत्री पी चिदंबरम द्वारा 2004-05 में इसे खत्म करने के बाद दोबारा पेश किया गया।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का (PSB) रीकैपिटलाइजेशन: सरकार ने PSB की खराब हालत को सुधारने के लिए बड़े पैमाने पर रीकैपिटलाइजेशन पहल की शुरुआत की। वित्तीय वर्ष 2018-19 में बैंक रीकैपिटलाइजेशन के लिए कुल 1.06 लाख करोड़ रुपये दिए गए।

नोटबंदी: नोटबंदी को विवादास्पद कदम माना गया। 8 नवंबर 2016 को देश में 500 रुपये और 1,000 रुपये के बैंक नोटों के चलन पर रोक लगा दी गई, जिसके कारण कई महीनों तक तरलता की गंभीर समस्या बनी रही। इसके बाद 500 रुपये और 2,000 रुपये के बैंक नोट जारी किए गए।

कर में छूट: प्रति वर्ष 5 लाख रुपये से कम आय वालों को आयकर के भुगतान से छूट दी गई थी, इसकी घोषणा जेटली ने अपने आखिरी केंद्रीय बजट में की थी। तब वे वित्त मंत्री थे।

सार्वजनिक उपक्रमों का विनिवेश: सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (सार्वजनिक उपक्रमों) में सरकार की हिस्सेदारी का विनिवेश वित्त मंत्री के जेटली के रहते हुए घाटे के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए किया गया था। वित्त वर्ष 2015 के लिए विनिवेश का लक्ष्य 1,05,000 करोड़ रुपये था।

जीएसटी परिषद का निर्माण: जेटली के समय जीएसटी परिषद का निर्माण हुआ। कर संरचना को आसान बनाने में जीएसटी परिषद का अहम योगदान है।

 

https://www.jagran.com/business/biz-former-finance-minister-arun-jaitley-dies-10-highlights-of-his-tenure-19514941.html

इतिहास रचने वाले 7 पूर्व CM समेत देश ने खोया इन दिग्गज नेताओं को, ये हैं कुछ अजब संयोग

Written by  on August 25, 2019

Source Jagran patrika

इतिहास रचने वाले 7 पूर्व CM समेत देश ने खोया इन दिग्गज नेताओं को, ये हैं कुछ अजब संयोग
यह महज इत्तेफाक है कि अगस्त 2018 से लेकर अगस्त 2019 तक एक साल से भी कम समय में देश ने तकरीबन दर्जन भर दिग्गज नेताओं को खो दिया है। इनमें ज्यादातर नेता कांग्रेस-BJP के हैं।

नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। 9 अगस्त से दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (All India Institute of Medical Sciences) में भर्ती भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को दुनिया को अलविदा कह दिया। एम्स में भर्ती रहने के दौरान उन्होंने 15 दिन तक जिंदगी की जंग लड़ी और मौत को मात देने की कवायद में जुटे रहे, लेकिन शनिवार को पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली जिंदगी की जंग हार गए और उनका निधन हो गया।

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यह महज इत्तेफाक है कि अगस्त, 2018 से लेकर अगस्त, 2019 तक एक साल से भी कम समय में देश ने तकरीबन दर्जन भर दिग्गज नेताओं को खो दिया है। इनमें ज्यादातर नेता कांग्रेस (Congress) और भारतीय जनता पार्टी (Bhartiay Janta Party) से जुड़े थे और इन सभी ने किसी-न-किसी रूप में इतिहास रचा। इनमें सबसे बड़ा नाम भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का है, जिनका निधन 16 अगस्त, 2018 को दिल्ली के एम्स में ही हुआ था। इसके बाद मदन लाल खुराना, शीला दीक्षित, मनोहर पर्रिकर, जयपाल रेड्डी, सुषमा स्वराज, नारायण दत्त तिवारी, जगन्नाथ मिश्रा, बाबू लाल गौर और शनिवार को अरुण जेटली ने भी एम्स में अंतिम सांस ली।

भाजपा के तीन पूर्व केंद्रीय समेत और एक सीएम का अगस्त महीने में निधन
यह मजह इत्तेफाक है कि इस साल अगस्त महीने में ही तीन पूर्व केंद्रीय मंत्रियों (मनोहर पर्रिकर, सुषमा स्वराज और अरुण जेटली) का निधन हुआ, जबकि बाबू लाल गौर का निधन भी अगस्त महीने में हुआ। बता दें कि मूलरूप से उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ के रहने वाले बाबू लाल गौर ने मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री बनकर एक इतिहास ही रचा था।

वहीं, बिहार के पूर्व सीएम जगन्नाथ मिश्रा का निधन 19 अगस्त को दिल्ली के द्वारका में हुआ था। उन्हें बिहार में तीन बार मुख्यमंत्री रहने का रुतबा हासिल था।

28 जुलाई को हुआ केंद्रीय मंत्री जयपाल रेड्डी का निधन
पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयपाल रेड्डी (Jaipal Reddy) का पिछले महीने 28 जुलाई को हैदराबाद में निधन हो गया। पूर्व केंद्रीय मंत्री जयपाल रेड्डी पिछले कई दिनों से खराब स्वास्थ्य की समस्या से गुजर रहे थे। उनके निधन पर राज्यसभा में श्रद्धांजली देने के दौरान उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडु रो पड़े थे।

7 पूर्व सीएम का एक साल से भी कम समय में निधन
इनमें पांच, नारायाण दत्त तिवारी, मदन लाल खुराना, शीला दीक्षित, सुषमा स्वराज (दिल्ली), जगन्नाथ मिश्रा (बिहार) और बाबू लाल गौर (मध्य प्रदेश)  के सीएम रह चुके थे। इनमें सबसे बड़ा नाम तो नारायण दत्त तिवारी का था, जिन्होंने इस लिहाज से इतिहास रचा था कि वे दो राज्यों (उत्तर प्रदेश और उत्तरांखड) के सीएम रहे इकलौते भारतीय नेता था। अब तक यह रिकॉर्ड उन्हीं के नाम है।

इमानदारी की मिसाल माने जाने वाले गोवा के सीएम रहे मनोहर पर्रिकर का भी निधन 17 मार्च, 2019 को हुआ। उन्होंने रक्षामंत्री के तौर पर अपनी अहम भूमिका निभाई।

दिल्ली से जुड़े 4 बड़े नेताओं का निधन
दिल्ली से जुड़े तीन बड़े नेताओं शीला दीक्षित (20 जुलाई), सुषमा स्वराज (6 अगस्त) और अरुण जेटली (24 अगस्त) का निधन हुआ। इनमें दो (शीला दीक्षित और सुषमा स्वराज) नेता तो दिल्ली के पूर्व सीएम रह चुके थे, जबकि अरुण जेटली 1999 से 2012 तक दिल्ली एवं जिला क्रिकेट संघ (Delhi and District Cricket Association)  के अध्यक्ष भी रहे।

माना जाए तो एक साल के भीतर दिल्ली ने तीन नहीं चार बड़े नेताओं (मदन लाल खुराना, शीला दीक्षित, सुषमा स्वराज और अरुण जेटली) को खोया है, जिनका राज्य स्तर पर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में भी दखल था। चारों ही केंद्रीय मंत्री रहे चुके थे।

दो नेताओं ने की थी डीयू से पढ़ाई
इनमें अरुण जेटली और शीला दीक्षित ने तो दिल्ली विश्वविद्यालय (Delhi university) से पढ़ाई की थी। केंद्र में वित्त मंत्री जैसा अहम महकमा संभालने वाले अरुण जेटली ने तो दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (Delhi University Students Union) से राजनीति के करियर की शुरुआत की थी।

तीन का जन्म पंजाब में, बाद में बने दिल्ली के सीएम
मदन लाल खुराना, शीला दीक्षित और सुषमा स्वराज तीनों का रिश्ता पंजाब से रहा था। जहां सुषमा स्वराज का जन्म अंबाला (फिलहाल हरियाणा में, विभाजन से पहले यह पंजाब में था) में हुआ तो शीला दीक्षित का जन्म पंजाब के कपूरथला में हुआ था। वहीं, मदन लाल खुराना का जन्म पंजाब (पाकिस्तान) में हुआ था। बाद में तीनों की दिल्ली के मुख्यमंत्री बने।

मदनलाल खुराना और सुषमा स्वराज का रात को हुआ निधन
यह महज संयोग है कि भाजपा से जुड़े दोनों मुख्यमंत्रियों (मदन लाल खुराना और सुषमा स्वराज) का निधन रात को हुआ। जब मदन लाल खुराना ने 27 अक्टूबर को अंतिम सांस ली तो वह दिन शनिवार का था और समय रात का था। वहीं, सुषमा स्वराज का निधन भी रात को ही हुआ।

शीला, मदन लाल खुराना और अरुण जेटली का शनिवार को हुआ निधन
यह भी महज संयोग है कि शीला दीक्षित, मदन खुराना और अरुण जेटली का जिस दिन निधन हुआ वह दिन शनिवार ही था।

शीला, मदन लाल खुराना, मनोहर पर्रिकर और सुषमा स्वराज चारों रहे केंद्रीय मंत्री
यह भी संयोग अजब है कि चारों ही केंद्रीय मंत्री रहे। जहां शीला दीक्षित सीएम बनने से पहले केंद्रीय मंत्री बनीं तो सुषमा स्वराज और मदनलाल खुराना पूर्व मुख्यमंत्री होने के बाद केंद्रीय मंत्री के पद पर रहे। वहीं, मनोहर पर्रिकर गोवा के कई बार सीएम रहे फिर केंद्रीय मंत्री रहने के बाद फिर से सीएम का पद संभाला।

https://www.jagran.com/politics/national-ncr-india-lost-these-veteran-leaders-including-6-former-chief-minister-who-created-history-jagran-special-19514822.html

 

Many coincidences /Trivia with Actors previous life/movies in Sacred Games

Written by  on August 24, 2019
    1. Saif ali khan main protogonist is Shahid  Khan antagonist ,every body knows his Shahid kapur connection
    2. In Movie Rangoon in Climax saif tried to kill shahid same way and pose
    3. Rangoon has Kangana ranaut and in sacred games we have her look a like
    4. Movie Udta Punjab ,which is from Anurag Kashyap same director has Kareena kapur as drugs doctor and shahid kapur as addict,here saif ali khan has gochi ,hope taimoor gets saved from drugs
    5. Anupriya Goenka aka Megha (sartaj wife),worked in movie padmvat before in which her hushand,again shahid kapur has second wife ,in novel sartaj moves on to jojo sister
    6. this has been found by some one else but kalki koechin (batya) ,whose first real name is kalki ,vishnu 10th avtar as per purana who is going to finish kalyug
    7. kalki is director anurag kashyap (ex ) wife who is giving sex scene in front of him, same thing happened before many times but mainly Ketan Mehta movie  maya memsaab where deepa mehta had sex scene with srk has recently done tv serial called time bomb 26/11 on zee tv
     
    http://vijayshetty.com/many-coincidences-trivia-with-actors-previous-life-movies-in-sacred-games.html

Main Reasons Malcolm not killed Sartaj Multiple times

Written by  on August 24, 2019

Image result for malcolm sacred games

 

Malcolm had met Sartaj 2 times both time in battle ,each time he did not killed him,while he never hesitated to kill

Points to Note

  1. in 1st season he cut Sartaj thumb and maybe wanted to cut  other fingers of all tortures  ,note kalgranth had finger prints
  2. Malcom broke in Zoya house in s2 e01 ,he could had killed her but he wanted kalgranth
  3. Qurbani where we kill what we like most,guruji though Ganesh like mumbai most so he sent ganesh.ganesh and malcolm are narcissistic so they done suicide
  4. Guruji told kach story ,observe points
  •  kach was killed,here kach was Dilbaug singh 100% he was killed
  •  when kach was killed devyani cried,it may be batya
  •  kach was again given life its Sartaj Singh,rakshas promised kach will never die so unless last climax nobody from ashram tried to kill Sartaj

TSPSC 2018 – Group 2 Exam Results Released

Written by  on March 16, 2019

TSPSC Group 2 Notification 2016 – Apply Online for 1032 Vacancies: Telangana State Public Service Commission (TSPSC) has issued a supplementary notification for the recruitment of 1032 Municipal Commissioner, Asst Commercial Tax Officer & Other vacancies on General recruitment. Eligible candidates can apply online from 02-09-2016 to 23-09-2016 (Extended to 26-09-2016). Other details like age limit, educational qualification, selection process, application fee, examination fee & how to apply are given below…

TSPSC Group 2 Vacancy Details:
Total No.of Posts: 1032
Name of the Posts:
1. Municipal Commissioner Gr.III in (Municipal Administration Sub Service): 19 Posts
2. Assistant Commercial Tax Officer (Commercial Tax Sub-Service): 156 Posts
3. Sub-Registrar Gr.II (Registration SubService): 23 Posts
4. Extension Officer (Panchayat Raj and Rural Development Sub Service): 67 Posts
5. Prohibition and Excise Sub Inspector (Excise Sub-Service): 284 Posts
6. Deputy Tahsildar in Land Administration: 259 Posts
7. Assistant Registrar in Registrar of Cooperative Societies: 62 Posts
8. Executive Officer Grade-I in Endowments Department: 11 Posts
9. Assistant Labour officer in Commissioner of Labour Department: 03 Posts
10. Assistant Development Officer in Handlooms & Textiles: 20 Posts
11. Assistant Section Officer GAD (Single Unit) Secretariat: 90 Posts
12. Assistant Section Officer in Finance Department Secretariat: 28 Posts
13. Assistant Section Officer in Law Department Secretariat: 10 Posts

Age Limit: Candidates age should be between 20-44 years for S.No-3, 18-28 for S.No-5 & 18-44 for remaining all posts as on 01-07-2016. Age relaxation is applicable to 5 years for SC, ST & BC’s, 10 years for PWD & for other refer notification.

Educational Qualification: Candidates should possess Bachelor’s Degree from any recognized University in India established for S.No-1 to 9, Bachelor’s Degree of a University in India established for S.No-10 & 11, Bachelor’s Degree in Mathematics or Economics or Commerce from any University in India established for S.No-12 & Bachelor’s Degree in Law from any University in India established for S.No-13.

Selection Process: Candidates will be selected based on OMR Based Examination & Oral Test in the shape of Interview.

Application Fee: Candidates should pay Rs. 200/- through online by SBI ePay.

Examination Fee: Candidates have to pay Rs. 120/- through online by SBI ePay. No fee for SC, ST, BC, PH & Ex-Service Men, Unemployed applicants in the age group of 18-44 years of Telangana State.

How to Apply: Eligible candidates may apply online through the website www.tspsc.gov.in from 02-09-2016 to 23-09-2016  (Extended to 26-09-2016).

Instructions to Apply Online:
1. Before applying online candidates should have scanned copies of Photograph & Signature.
2. Log on through the website www.tspsc.gov.in.
3. Select the desired notification in Whats New.
4. Read the notification clearly before applying online.
5. Click on “One-Time Registration” & Fill all the details carefully.
6. Upload the copies of Photograph & Signature & make payment.
7. Check once before submitting the form & Submi the error free application form.
8. Now take printout of online application for future use.

Important Dates:
Starting Date for Online Application: 02-09-2016.
Last Date for Online Application: 23-09-2016 (Extended to 26-09-2016).
Date of Download of Hall Tickets: 07 days before commencement of Examination.
Date of Written Examination: 11-11-2016 & 13-11-2016.
Date for Certificate Verification: 05 & 06-12-2018 at 10:00 A.M. onwards.
Dates for Web Options: 07 to 09-12-2018

For more details like vacancy details & other information click on the link given below….

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Tags:Telangana State Govt Jobs, TSPSC Jobs

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Patna High Court Admit Card 2019 – District Judge Written Test Call Letter

Written by  on March 16, 2019

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RPF 2019 – SI 2nd Round DV, PMT, PET Admit Card Download

Written by  on March 16, 2019

RPF 2019 – Constable (Group E) 2nd Round DV, PMT, PET Admit Card: Railway Protection Force (RPF) has released admit card for attending 2nd round PET, PMT, DV for the post of Constable (Group E). 2nd round DV, PMT & PET will be held from 1st week of April 2019. Candidates who have applied can download their admit card from the link given below…

Click here to Download Constable 2nd Round DV, PMT, PET Admit Card

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RPF 2019 – SI (Group E) 2nd Round DV, PMT, PET Admit Card: Railway Protection Force (RPF) has released admit card for attending 2nd round PET, PMT, DV for the post of Sub Inspector (Group E). 2nd round DV, PMT & PET will be held from 1st week of April 2019. Candidates who have applied can download their admit card from the link given below…

Click here to Download SI 2nd Round DV, PMT, PET Admit Card

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Tags:RPF Jobs, RPF Results

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